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Friday, 8 March 2013

new date 11 monday ki... stay continued


new date 11 monday ki... stay continued
अब वृहद पीठ सुनेगी बीएड अभ्यर्थियों का मामला
गैर टीईटी बीएड को सहायक अध्यापक बनाने पर नए सिरे से होगी सुनवाई
• अमर उजाला ब्यूरो

इलाहाबाद। बिना टीईटी उत्तीर्ण बीएड डिग्री धारकोें को भी सहायक अध्यापक चयन प्रक्रिया में शामिल करने का मामला एक बार फिर खटाई में पड़ गया है। इस मामले पर प्रभाकर सिंह केस में दिए हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को वृहद पीठ को संदर्भित कर दिया गया है। अब तीन न्यायाधीश की पीठ नए सिरे से पूरे मामले पर विचार करने के बाद फैसला सुनाएगी।
प्रदेश सरकार द्वारा बिना टीईटी उत्तीर्ण कई बीएड डिग्री धारकोें का अभ्यर्थन रद किए जाने के बाद शिवकुमार शर्मा, यतींद्र कुमार त्रिपाठी आदि ने याचिका दाखिल की थी। इनका कहनाथा कि खंडपीठ के निर्णय के बावजूद प्रदेश सरकारने उनका अभ्यर्थन नहीं माना। ऐसी स्थिति में सरकार को निर्देश दिया जाए। मामले की सुनवाई कररहे न्यायमूर्ति एपी साही ने कहा मेरी समझ से टीईटी सभी के लिए अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में उन्होंने खंडपीठ के फैसले से असहमति जताते हुए मामले को वृहद पीठ को संदर्भित किया। अब मुख्य न्यायाधीश इस मामले की सुनवाई के लिए तीन जजों की पीठ गठित करेेंगे।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 11 नवंबर 2011 को टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने को लेकर दाखिल सैकड़ों याचिकाओं को खारिज करते हुए सहायक अध्यापक भर्ती में टीईटी सभी के लिए अनिवार्य बताया था। इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की गई। अपील भी खारिज कर दी गई परंतु खंडपीठ ने कहा कि एनसीटीई की अधिसूचना के मुताबिक सहायक अध्यापक भर्ती के लिए अनिवार्य अर्हता के अंतर्गत ही बीएड डिग्री धारकोें को इससे छूट दी गई है। इसलिए बीएड डिग्री धारी अभ्यर्थियों को जो टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं प्रवेश प्रक्रिया में शामिल कर लिया जाए। खंडपीठ ने बीएड डिग्री धारकों को मौका देने का निर्देश दिया था। इस आदेश का पालन नहीं होने पर दाखिल अवमानना याचिका पर बेसिक शिक्षा सचिव को नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
•प्रभाकर सिंह केस में खंडपीठ के आदेश से एकल न्यायपीठ असहमत
2 लाख से ज्यादा प्राथमिक शिक्षको को मिल सकती है नौकरी
क्या उत्तर प्रदेश में सरकार को शिक्षको की वाकई जरुरत है? शायद हाँ और शायद नहीं| “शायद” इसलिए क्यूंकि ये तर्क और कुतर्क का विषय है| सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 2007 (जब से स्टूडेंट का डाटा ऑनलाइन हुआ है) के बाद लगातार छात्र संख्या गिरती जा रही है| पिछले पांच साल से कोई भर्ती प्राइमरी शिक्षक की नहीं हुई है| इसके बाबजूद प्रदेश में हैं कोई हाहाकार नहीं है| स्कूल खुल रहे है|

 कहीं जरुरत से ज्यादा शिक्षक है तो कहीं शिक्षक की कमी है| मगर बच्चो की उपस्थिति को पैमाने पर तौला जाए तो शायद प्रदेश में शिक्षको की कोई कमी है ही नहीं| क्यूंकि मिड डे मील के आंकड़ो के मुताबिक प्राथमिक स्कूलों में औसतन 60 प्रतिशत बच्चे ही नामांकन के सापेक्ष स्कूल में पहुच रहे है| जाहिर है नामांकन और उपस्थिति सवालों के घेरे में है| बसपा सरकार हो या सपा सरकार दोनों में हालत एक जैसी है| 

प्राथमिक शिक्षा की दुर्दशा न लगे इसके लिए किसी भी बच्चे को फेल न करने का शासनादेश कर दिया गया| इसके पीछे तर्क दिया गया- बच्चो का मनोबल नहीं गिराना है| ये कुतर्क है या तर्क जनता को सोचना है| मगर सरकार ने मान लिया है| प्राथमिक स्कूल के बच्चे वोटर नहीं होते इसलिए माया, मुलायम और अखिलेश किसी को चिंता करने की जरुरत भी नहीं है|  

प्रदेश में शिक्षा का कोई संकट नहीं है| हकीकत ये है कि प्राथमिक सरकारी स्कूलों में शिक्षा का कार्य शिक्षा मित्र (कॉन्ट्रैक्ट टीचर) ने संभाल लिया है| 3500 रुपये मासिक वेतन वाले शिक्षको का काम रुपये 25000 हजार मासिक का वेतन पाने वाले स्थायी प्राथमिक शिक्षको से बेहतर निकला| 

ऐसे में बैठे बिठाये 72000 शिक्षको को भर्ती करके 1800 करोड़ सालाना का राजस्व भार जनता के खजाने पर क्यूँ डाला जाए? ये बड़ा और चिंतनीय विषय तो है ही सरकार के बड़े बड़ो के दिमाग में विचाराधीन भी है| प्रदेश के करदाता के साथ ये अन्याय होगा कि उसके द्वारा चुकाए गए धन का दुरूपयोग हो| एक प्राथमिक शिक्षक के वेतन के बदले तीन तीन शिक्षक संविदा पर रखे जा सकते है| और टेट पास दो लाख से ज्यादा बेरोजगारों को नौकरी भी मिल जाएगी| वर्तमान में अदालत में उलझा मामला भी मिनटों में निपट जायेगा| 
वर्तमान में हालत तो यही है| उन प्राथमिक स्कूलों के बच्चे जहाँ 100 बच्चो पर चार पांच शिक्षक की तैनाती है वहां के कक्षा 5 के बच्चे पहाड़े नहीं जानते| शिक्षा का स्तर घटिया है और गुणवत्ता की तो वाट ही लगी हुई है| ऐसे में मध्य प्रदेश की तरह उत्तर प्रदेश में भी संविदा शाला शिक्षक की तैनाती ही सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है| सस्ते में शिक्षक और काम के बदले वेतन दोनों ल लाभ| सरकार पर बोझ भी कम पड़ेगा| शायद UPTET की न्यायालय में चल रही उधेड़बुन ये सबसे अच्छा विकल्प होगा|
अंग्रेजी की बाध्यता नहीं रहेगी परीक्षा में
रसिक द्विवेदी, सुल्तानपुर

बैंक में विभिन्न पदों के लिए परीक्षा की तैयारी कर रहे हिंदी माध्यम के उन लोगों के लिए यह खबर काफी सुकून देने वाली है। पीओएस/एमटीएस (प्रोबेशनरी अधिकारी/ ­मैनेजमेंट ट्रेनी) की भर्ती के लिए सामूहिक लिखित परीक्षा से अंग्रेजी रचना का प्रश्नपत्र हटा दिया गया है। सितंबर 2011 में एक संस्था द्वारा आयोजित कराई गई भर्ती परीक्षा के वर्णनात्मक प्रश्नपत्र में हिंदी में उत्तर देने का विकल्प खत्म कर दिया गया था। इस अन्यायपूर्ण कृत्य के खिलाफ सूचना के अधिकार के तहत आवाज उठाई गई तो, पहले कईविभागों ने हीलाहवाली की। मामला आखिरकार प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा जिसके बाद संबंधित संस्था को भावी लिखित परीक्षा से अंग्रेजी रचना का प्रश्नपत्र हटाना पड़ा।
स्टेट बैंक आफ इंडिया को छोड़कर देश के सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख 19 राष्ट्रीयकृत बैंकों के लिए मैनेजमेंट ट्रेनी (प्रबंध प्रशिक्षु) और प्रोबेशनरी आफीसर (परिवीक्षाधीन अधिकारी) पदों की भर्ती के लिए वर्ष 2011 में आइपीबीएस (इंस्टीट्यिूट आफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन) संस्था द्वारा परीक्षा आयोजित कराने का प्रावधान किया गया। संस्था ने हिंदी में उत्तर लिखे जाने का विकल्पसमाप्त कर दिया। अचानक इस परिवर्तन से हिंदी भाषी प्रतिभागियों को बड़ा धक्का लगा। आरटीआइ कार्यकर्ता डॉ.राकेश सिंह संस्था के इस निर्णय पर सवाल उठाया। कहाकि संविधान के अनुच्छेद 343 व 351 की मूलभावना के साथ खिलवाड़ किया गया है। प्रकरण में मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप करने की अपील की।
 यूपी के 18 हजार सिपाहियों को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को वापस लेने की अनुमति दी
अब तक का
घटनाक्रम

• 8 दिसंबर, 2008 को उच्च न्यायालय ने सारी बर्खास्तगी रद्द कर दी और निरस्त भर्ती बोर्डों से चयनित सभी सिपाहियों को तैनाती के निर्देश दिए।
• हाईकोर्ट के आदेश पर 9 दिसंबर, 2008 को सरकार ने हाईकोर्ट में विशेष अपील दाखिल करने का फैसला किया।
• 4 मार्च, 2009 को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद विशेष अपील खारिज कर दी और पुराने फैसले को बरकरार रखा।
• सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी उच्च न्यायालय के फैसले कोबरकरार करने को कहा।
• इस पर सरकार ने सर्वोच्च अदालत में विशेष रिट याचिका दायर की थी।
• सपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहले कैबिनेट बैठक में एसएलपी वापस लेने का फैसला किया था।
• 8 मार्च को सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल उत्तर प्रदेश सरकार की एसएलपी को औपचारिक व न्यायिक प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए वापस ले लिया गया।
नई दिल्ली। यूपी के 18000 से अधिक कांस्टेबल के लिए राहतभरी खबर है। इन सभी की नियुक्तियों को प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बसपा सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यूपी सरकार को इस मसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को वापस लेने की अनुमति प्रदान कर दी।
मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल 2005-06 के दौरान हुई 18400 कांस्टेबलों की भर्ती में अनियमितताओं के आरोप पर दाखिल पीआईएल पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद मई 2009 में मायावती सरकार ने शीर्ष कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट के 4 मार्च 2009 के आदेश के खिलाफ अपील को सर्वोच्च अदालत ने स्वीकार कर लिया था। हालांकि सपा सरकार ने इस याचिका को वापस लेने की अपील सर्वोच्च अदालत से की थी, जिसे शुक्रवार को जस्टिस अफताब आलम की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्वीकार कर लिया।
कांस्टेबलों की भर्ती में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी की शिकायतों के चलते जून 2007 में एफआईआर दर्ज की गई थी। तत्कालीन बसपा सरकार ने ब्यूरोक्रेट शैलजा कांत मिश्रा के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था, जिसने सितंबर 2007 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद प्रदेश कैबिनेट ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी, लेकिन सीबीआई ने इसे लेने से इंकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को ऐसे मामलों को उचित समीक्षा और जांच के ऐसे मामलों से निपटने को कहे जाने के बाद सरकार ने शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर की थी।
इस बीच लखनऊ में सपा प्रवकत और कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी ने कहा कि इससे 18 हजार से अधिक कांस्टेबलों के साथ न्याय हुआ है
परियोजना कार्यालय से अनुदेशकों का होगा चयन
Updated on: Fri, 08 Mar 2013 08:40 PM (IST)

हरदोई, कार्यालय संवाददाता: उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अनुदेशकों की चयन प्रक्रिया में खेल नहीं हो सकेगा। चयनित सूची राज्य परियोजना कार्यालय से भेजी जाएगी। जिला स्तरीय समिति चयनित आवेदकों की काउंसिलिंग कराएगी और फिर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा जिसके बाद एक जुलाई से उनकी विद्यालयों में तैनाती कर दी जाएगी।
परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कला, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा व कार्य शिक्षा के 1380 अनुदेशकों की नियुक्ति होनी है। राज्य परियोजना निदेशालय से आन लाइन आवेदन मांगे गए थे और 23 मार्च तक आवेदन जमा होने हैं। जिला समन्वयक प्रशिक्षण विनोद कनौजिया ने बताया कि परियोजना स्तर से पूरी नियुक्ति प्रक्रिया 8 अप्रैल तक पूरी कर सूची भेजी जाएगी और सूची में शामिल चयनित आवेदकों की 30 अप्रैल को जिला स्तर पर समिति काउंसिलिंग करवाएगी। काउंसिलिंग समिति अध्यक्ष, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की प्राचार्या डा.मीरा पाल तथा बीएसए सचिव बनाए गए हैं। जीजीआईसी की प्रधानाचार्या आशा कनौजिया व जिला समन्वयक प्रशिक्षण विनोद कनौजिया इसके सदस्य होंगे। काउंसिलिंग की सूची 10 मई को जिलाधिकारी अनुमोदित करेंगे और उसके बाद 15 मई से नियुक्ति को हरी झंडी देकर 16 मई से उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा और फिर एक जुलाई 2013 से उन्हें विद्यालयों में शिक्षण कार्य के लिए भेज दिया जाएगा।

Thursday, 7 March 2013

nex date 11 march


UPTET: 11 मार्च को होगी अगली सुनवाई, शिक्षक भर्ती पर रोक जारी
March 8th, 2013 by जेएनआई-डेस्क
इलाहाबाद हाई कोर्ट में आज फिर उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती पर लगी जारी रखते हुए अगली सुनवाई की तारीख 11 मार्च लग गयी है| सम्भवतः 33 न० अदालत में माननीय न्यायाधीश हरकौली इसकी सुनवाई करेंगे
 


बीटीसी प्रशिक्षितों ने की नियुक्ति की मांग
लखनऊ। टीईटी पास बीटीसी प्रशिक्षितों ने फिर धरना-प्रदर्शन कर नियुक्ति की मांग उठाई है। धरनास्थल पर बृहस्पतिवार को बीटीसी 2010 टीईटी पास संबद्ध समिति के तहत धरने पर बैठे प्रशिक्षितों ने कहा कि कि कई बार वार्ता के बावजूद अब तक नियुक्ति नहीं हुई है। समिति के सतेंद्र कुमार उपाध्याय ने बताया कि सुबह बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने जल्द नियुक्ति का आश्वासन दिया है। सतेंद्र ने कहा कि जल्द ही नियुक्ति शुरू नहीं हुई तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

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टीईटी ऐसी बला, जो हमें परेशान किए है’
लखनऊ (ब्यूरो)। विधानपरिषद में गुरुवार को प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अनिवार्य की गई शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का भी मामला गूंजा। शिक्षक दल के नेताओंने शून्यकाल में टीईटी उत्तीर्ण न कर पाने की वजह से शिक्षकों को नौकरी न मिल पाने का मामला उठाया। नेता सदन अहमद हसन ने जवाब में कहा कि वह समस्या से इत्तिफाक रखते हैैं, बेसिक शिक्षा निदेशक से इस बारे में आख्या मांगी है। बोले- ‘टीईटी ऐसी बला है, जो हमें परेशान किए है और शिक्षा विभाग के अफसर भी हमें टीईटी के नाम पर धमकाते हैं।’
शून्यकाल में शिक्षक दल के ओम प्रकाश शर्मा, जगवीर किशोर जैन, हेम सिंह पुंडीर, सुभाष चंद्र शर्मा व अन्य सदस्यों ने 2007-2008 में प्रशिक्षणप्राप्त विशिष्ट बीटीसी के 88000 शिक्षकों में पांच फीसदी अभ्यर्थियों की नियुक्ति अभी तक न किए जाने का मामला कार्य स्थगन के रूप में उठाया। कहा कि इनकी नियुक्ति स्कूलों में इसलिए नहीं हो पा रही है क्योंकि इन अभ्यर्थियों ने टीईटी उत्तीर्ण नहीं किया है। नेता सदन अहमद हसन ने आश्वासन दिया कि सरकार जनहित में फैसला लेगी। शिक्षा के क्षेत्र में यह बड़ा निर्णय होगा।

-विधान परिषद में छलका नेता सदन का दर्द

जागरण ब्यूरो, लखनऊ : कक्षा एक से आठ तक में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अनिवार्य की गई अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर विधान परिषद में नेता सदन अहमद हसन का दर्द गुरुवार को छलक गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी हमें टीईटी के नाम पर धमकाते हैं। यह एक ऐसी बला है जो हम सबको परेशान किये हुए है।'

हुआ यूं कि शून्यकाल के दौरान शिक्षक दल के ओम प्रकाश शर्मा व सुरेश त्रिपाठी ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत सदन को अवगत कराया कि 2007-08 में विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 88000 अभ्यर्थियों में से पांच प्रतिशत की परिषदीय स्कूलों में नियुक्ति नहीं हो पा रही है क्योंकि इन अभ्यर्थियों ने टीईटी उत्तीर्ण नहीं किया है। इस पर नेता सदन ने कहा कि प्रकरण में बेसिक शिक्षा निदेशक से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने पर कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कांग्रेस के नसीब पठान यदि मदद करें तो केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार शिक्षकों की भर्ती में टीईटी से छूट दे सकती है।

इससे पहले टीईटी का मुद्दा प्रश्नकाल के दौरान भी उठा। भाजपा के हृदय नारायण दीक्षित ने बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी से पूछा क्या मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारकों को परिषदीय स्कूलों में शिक्षक नियुक्त करने की कोई प्रक्रिया चल रही है? जवाब में बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि 1997 से पहले मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारकों को शिक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया विचाराधीन है लेकिन इसमें टीईटी बाधा बन रही है। मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारक टीईटी से छूट दिये जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया इस प्रकरण पर विचार करने के लिए उन्होंने 14 मार्च को अफसरों की बैठक बुलायी है
आज "महिला दिवस" के अवसर पर सभी महिलाओं का खूब खूब अभिनन्दन

आज 8 मार्च का दिन "महिला दिवस" के रूप में मनाया जाता है ,,इस दिन की शुरुआत भले ही 8 मार्च 1910 को कोपेनहेगन में हुए "महिला सम्मेलन " से शुरू हुआ हो मगर .".भारतीय संस्कृति " के अनुसार तो "नारी शक्ति " को समाज में एक विशेष स्थान सदियों पहले से ही प्राप्त है .."नारी शक्ति" की पूजा तो हमारे समाज में सदियों से हमारी परम्परा का एक मजबूत हिस्सा रही है । किसी भी इंसान के जीवन में जिन तीन शक्तियों की नितांत आवशयकता होती है ..वो हैं .."शक्ति".यानी बल .....दूसरी "ज्ञान" यानी .बुद्धि ...और तीसरी "धन"यानी पैसा ...तो दोस्तों .इन तीनो आवशयकताओं को पाने के लिए हमारे समाज में "नारी शक्ति " की ही पूजा की जाती है । शक्ति के लिए "माँ दुर्गा" ...ज्ञान के लिए "माँ सरस्वती " और धन के लिए " माँ लक्ष्मी" की "नारी शक्ति" के रूप में हमारे समाज में स्थापित हैं । इन पुरानी परम्पराओं की मान्यत्ता के बाद भी कई बुराइयाँ "रोज के जीवन" में कई बुरी घटनाओं के रूप में सामने आ जाती हैं ..उन बुराइयाँ को जड़ से ही निर्मूल करने की बेहद जरूरी है । इस काम के लिए पूरे समाज को एकजुट होने के अलावा " नारी शक्ति " को भी एक विशेष भूमिका निभाते हुए अपनी पहचान को और भी लौखंडी बनाने की आवशयकता है । आज के दिन ही सिर्फ नहीं ,हमेशा समाज में अपनी पूख्ता किरदार के लिए सभी नारियों का फिर से बहुत बहुत अभिनन्दन

समय पर सेवा दिलाने वाले बिल को मंजूरी.................
समय पर काम नहीं तो 50 हजार जुर्माना
•अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। सरकारी बाबुओं के ढुलमुल रवैये से आए दिन हम परेशानी झेलते आए हैं। राशन कार्ड बनवाना हो या पेंशन पाना, जब तक सरकारी दफ्तरों के दर्जन भर चक्कर न काट लें, काम होता ही नहीं। मगर अब इस समस्या से जल्द ही निजात मिल जाएगी और तय समय सीमा के भीतर सरकारी कार्यालय अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘राइट टू टाइम बाउंड डिलीवरी ऑफ पब्लिक सर्विसेज’ विधेयक यानी समय पर सेवा दिलाने वाले बिल को मंजूरी मिल गयी है। सरकार ने उम्मीद व्यक्त की है संसद के इसी बजट सत्र में यह विधेयक पारित हो जाएगा।
बिल में सरकार प्रत्येक सेवा के लिए एक समय सीमा निर्धारित करेगी। उक्त समय सीमा पर काम न होने पर संबंधित विभाग के अधिकारी पर 250 रुपये रोजाना की दर से जुर्माना वसूलने का प्रावधान किया गया है, जो उसके वेतन से काटा जाएगा।

क्या होगा खास..................

•बिल में प्रत्येक सेवाओं यानी सरकारी प्राधिकार के लिए सिटीजन चार्टर प्रकाशित करने संबंधी दायित्व को तय किया गया है। इसमें इस बात का उल्लेख होगा कि कोई कार्य कितने दिन में होगा और कितने समय में सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही यदि सरकारी अधिकारी समय पर कार्य करने के प्रावधानों का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें जुर्माना भरना होगा। इसके अलावा नागरिकों की शिकायतों के निपटारे के लिए एक तंत्र भी बनाया जाएगा।
•पीएम की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया फैसला
•देरी होने पर अधिकारी के वेतन से कटेंगे 250 रुपये प्रतिदिन

.......विधेयक में समय पर सेवा दे पाने में विफल रहने वाले किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। बताया जा रहा है कि प्रवासी भारतीयों को विधेयक के दायरे में लाने के मुद्दे को कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय और कानून मंत्रालय अलग-अलग देखेंगे। प्रस्तावित विधेयक सरकारी प्राधिकार के लिए कॉल सेंटर, कस्टमर केयर सेंटर, सहायता केंद्र और लोक प्रोत्साहन प्रणाली स्थापित करने को अनिवार्य बनाएगा ताकि सेवाओं को समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना सुनिश्चित हो सके। विधेयक में केंद्र एवं राज्य स्तर पर लोक शिकायत निवारण आयोग बनाने का भी प्रस्ताव है। आयोग के फैसले से नाराज कोई व्यक्ति केंद्र के लोक शिकायत निवारण आयोग के फैसले के मामले में केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त के समक्ष अपील दायर कर सकता है।

Wednesday, 6 March 2013

shikshamitro ne khoob kanal ki

लिपिक की नियुक्ति को कंप्यूटर प्रशिक्षण अनिवार्य
Updated on: Wed, 06 Mar 2013 11:11 PM (IST)
जागरण संवाददाता, आगरा: शिक्षकों की भर्ती में शिक्षक पात्रता परीक्षा के समान लिपिकों की भर्ती में भी अब कंप्यूटर प्रशिक्षण अनिवार्य हो गया है। बिना कंप्यूटर कोर्स के प्रमाण पत्रके आवेदकों को लिपिक के पद पर नियुक्ति नहीं मिलेगी। उन्हें सीसीसी (कोर्स ऑन कंप्यूटर कांसेप्ट) करना होगा।
आइसीईटी (इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटिंग विद इनहैंस टेक्नोलॉजी) के निदेशक अरविंद सुतैल ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीसीसी कोर्स का कोर्स नालंबद स्थित आईसीईटी कंप्यूटर एजूकेशन पर किया जा सकता है। 80 घंटे के कोर्स में हाईस्कूल उत्तीर्ण 18 से 35 वर्ष के सभी अभ्यर्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए 26 अप्रैल तक अभ्यर्थी आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं। 20-20 के बैच में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो दो से ढाई माह तक चलेगा।
शिक्षा मित्रों की परीक्षा में जमकर नकल
Updated on: Wed, 06 Mar 2013 10:05 PM (IST)
शिक्षा मित्रों की परीक्षा में जमकर नकल
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अछनेरा: द्वितीय बैच में बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षा मित्रों के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान जमकर नकल का खेल चला। हालात ये थे कि शिक्षा मित्र खुले में किताब रखकर न सिर्फ नकल कर रहे थे, बल्कि एक दूसरे की मदद भी ले रहे थे।
अछनेरा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बुधवार को हुई परीक्षा के दौरान जमकर नकल की गई। परीक्षा देने आए 128 शिक्षा मित्रों में से अधिकांश के पास परीक्षा से संबंधित किताबें थीं। वे खुले में नकल कर प्रश्न पत्र हल कर रहे थे। बताया जाता है कि ड्यूटी पर तैनात पांच शिक्षा कर्मियों में से सिर्फ एक ही तैनात था। पता करने पर बताया गया कि परीक्षा के बारे में किसी को पता ही नहीं है। शासन द्वारा शिक्षामित्रों को शिक्षक का दर्जा दिए जाने की मंशा के तहत गुरुजनों द्वारा इस तरह नकल करके पास होने के तरीके से सब हैरान हैं। लोगों में चर्चा है कि वे आगे चलकर बच्चों को क्या पढ़ा पाएंगे। 
 
UPTET : टीईटी के पैसों का नहीं मिल रहा हिसाब
टीईटी के पैसों का नहीं मिल रहा हिसाब
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Shikshamitra, uptet latest news, tet news, uptet today news: This is a blog of uttar pradesh teacher requirement लखनऊ (ब्यूरो)। टीईटी के फार्मों की बिक्री से आए पैसों का हिसाब नहीं मिल पा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग अब वित्त विभाग से इसकी विशेष ऑडिट कराने की तैयारी कर रहा है, ताकि पैसे कहां गए इसका पता लगा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
नवंबर 2011 में टीईटी आयोजित कराई गई थी। 11,53,155अभ्यर्थियों ने फार्म भरे। जानकारों की मानें तो टीईटी फार्म भरने से माध्यमिक शिक्षा विभाग को 64 करोड़ रुपये मिले। परीक्षा कराने के लिए प्रत्येक मंडलों को 30 से 32 लाख रुपये दिए गए। रिजल्ट तैयार करने वाली कंप्यूटर कंपनी को 5 करोड़ रुपये के आसपास दिए गए। बाकी पैसे कहां खर्च किए गए पता नहीं चल पा रहा है और न ही माध्यमिक शिक्षा परिषद इसका हिसाब बेसिक शिक्षा विभाग को दे पा रहा है। प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा सुनील कुमार इस संबंध में बेसिक शिक्षा परिषद के निदेशक को कई बार पत्र लिख चुके हैं। सूत्रों के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग ने तय किया है कि टीईटी के पैसों की विशेष ऑडिट करा ली जाए, ताकि पैसे के बारे में जानकारी मिल सके। यह भी बताया जा रहा है कि हिसाब न मिलनेपर तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव प्रभा त्रिपाठी के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है
पदोन्नति पर रोक से शिक्षकों को झटका
अमर उजाला ब्यूरो
चंदौसी। जिले के 1900 से अधिक शिक्षकों की उम्मीदों को झटका लगा है क्योंकि शासन ने बेसिकशिक्षा विभाग के शिक्षकों की पदोन्नति पर दोबारा रोक लगा दी है। सचिव बेसिक शिक्षा ने गुरुवार की सुबह ही आदेश जारी किए हैं। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग में चल रहे पदोन्नति प्रक्रिया पर फिलहाल विराम लग गया है। अग्रिम आदेशों तक अब शिक्षकों को इंतजार करना पड़ेगा।
बेसिक शिक्षकों की पदोन्नति एक साल से फंसी हुईहै। हाल ही में चार फरवरी को रोक हटाई गई थी। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने रोक हटते ही शिक्षकों की वरिष्ठता सूची तैयार कराई और 20 मई तक शिक्षकों की प्रोन्नति करने का निर्णय लिया था। प्रोन्नति की उम्मीदों को लेकर शिक्षक खुश थे लेकिन अचानक सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने अपने आदेश में पदोन्नति पर रोक लगा दी है। शिक्षकों को अब अगले आदेशों तक इंतजार करना होगा।
बैठक कर जताया रोष
चंदौसी। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ ने बैठक कर पदोन्नति पर रोक लगाए जाने का विरोध किया। बैठकमें ब्लाक अध्यक्ष गौरव मिश्रा ने कहा कि, शासन के आदेश पूर्णतया अनुचित हैं। शिक्षक संघों के दबाव के बाद यह रोक हटाई गई थी। दोबारा पदोन्नति पर रोक लगाकर शिक्षकों के विकास को राका जा रहा है। शिक्षक इसका विरोध करेंगे। संगठन की जिलाध्यक्ष संतोष यादव ने कहा कि, यदि शासन ने जल्द ही रोक नहीं हटाई तो शिक्षक आंदोलन करेंगे। इस मौके पर अनिल कपूर, विमलेश यादव, पारुल अग्रवाल, देवेंद्र सिंह मलिक, दिनेश चंद्र शर्मा, दिव्या पाठक, नत्थूलाल शर्मा, अनुज कुमार उपस्थित रहे।
सचिव बेसिक शिक्षा का आदेश गुरुवार की सुबह को ही प्राप्त हुआ है। हालांकि हमारी ओर से पदोन्नति से संबंधित सभी तैयारियां की जा रहीं थीं लेकिन आदेश के बाद प्रक्रिया थम गई है।
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प्रदीप कुमार द्विवेदी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, संभल।
•दोबारा लगी है रोक, जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 1900 शिक्षक प्रभावित
UPSC के नए परीक्षा फॉर्मेट में 'नैतिकता और ईमानदारी' का भी टेस्ट........ आज तक वेब ब्यूरो/भाषा | नई दिल्ली, 6 मार्च 2013 | अपडेटेड: 18:56
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने अपना परीक्षा मॉडल बदल दिया है, अब आईएएस बनने के लिए ईमानदारी और नैतिकता का भी टेस्ट देना होगा. इसके अलावा नए फॉर्मेट में सामान्य अध्ययन पर भी अधिक जोर दिया जाएगा.
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की ओर से यूपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में बदलाव पर जारी अधिसूचना के अनुसार सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षाओं में पहली बार ‘नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और एप्टीट्यूड’ का अलग से प्रश्नपत्र होगा. डीओपीटी ने प्रश्नपत्रों की अंक विभाजन प्रणाली में भी बदलाव किया है.
मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन विषय के अनिवार्य प्रश्नपत्र के अंक बढा दिए गए हैं. सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा 2013 से सामान्य अध्ययन के 250-250 अंकों के चार अनिवार्य प्रश्नपत्र होंगे. इसके अलावा इतने ही अंकों केदो वैकल्पिक प्रश्नपत्र भी होंगे.
पहले सामान्य अध्ययन के दो अनिवार्य प्रश्नपत्र होते थे और दो वैकल्पिक विषयों का. प्रत्येक प्रश्नपत्र 300 अंकों का होता था. मुख्य परीक्षा के लिए कुल अंक 1800 होंगे. निबंध और अंग्रेज़ी ज्ञान का प्रश्नपत्र पहले की ही तरह 300 अंकों का होगा.
सिविल सेवाओं के लिए प्राथमिक परीक्षा इस वर्ष 26 मई को होगी. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन देने की अंतिम तिथि चार अप्रैल है. सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों को इस प्रकार तैयार किया जाएगा जिससे किसी विषय में विशेषज्ञता हासिल किए बिना भी कोई अच्छा जानकार प्रश्नों के उत्तर देसके.
अधिसूचना में कहा गया है, ‘प्रश्नपत्र इस प्रकार तैयार किए जाएंगे जिनसे प्रत्याशी की विभिन्न विषयों की सामान्य जानकारी का आकलन किया जा सके.’ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाल में सिविल सेवा परीक्षाओं में बदलाव को मंजूरी दी थी.
परीक्षा प्रणाली में बदलाव का फैसला यूपीएससी द्वारा गठित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर अरुण एस. निगवेकर के नेतृत्व में गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया है.
 


Tuesday, 5 March 2013

Court update-today


Court update-
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Next date is 7 march.....
stay contn.

  Aaj hamara case take up hi nahi huaa is karan kal ki date mili hai. Isame ki chinta ki koi bat nahi hai.
Judge Harkauli ji mondey ko aayenge. I think kal agar hamara no aata hai to hamare mitra mondey ki date lenge. by tet nmerit sours...
Hamara case continue rahega means kal suna jayega kal na ho paya to parso suna jayega . And Stay will be continue.

यूपी बेसिक शिक्षक भर्तीः- इलाहाबाद,कोर्ट नं.33 में हरकौली जी की अनुपस्तिथि में मामला भरत भूषण जी की कोर्ट में स्थानान्तरित कर दिया गया था जहाँ पर मुकदमें को कल के लिए जारी रखा गया है
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चिव बेसिक शिक्षा को अवमानना का नोटिस



गैर टीईटी अभ्यर्थियों के मामले में खंडपीठ के आदेश की अवहेलना का आरोप
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Shikshamitra, uptet latest news, tet news, uptet today news: This is a blog of uttar pradesh teacher requirement इलाहाबाद(ब्यूरो)। गैर टीईटी उत्तीर्ण बीएड डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को भी सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के आदेश का पालन न करने पर हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव और अन्य अधिकारियोें को अवमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि जवाब न देने पर दोषीजनों पर आरोप तय किए जाएंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने विश्वनाथ प्रताप सिंह की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है।

अदालत ने इस दौरान आदेश के पालन का एक और मौका अधिकारियों को दिया है। एक माह में यदि वह आदेश का पालन नहीं करते हैं तो उनको न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कारण बताना होगा। यदि आदेश का पालन और हलफनामा दोनों नहीं दाखिल किया जाता है तो अधिकारियों को अदालत में स्वयं उपस्थित होना होगा। 16 जनवरी 2013 को खंडपीठ ने आदेश पारित किया था कि बिना टीईटी उत्तीर्ण किए बीएड पास अभ्यर्थियों को भी सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाए









News Source : Amar Ujala (6.3.2013)

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NOTE - Today is another important hearing in Allahabad Highcourt DB in the bench of Hon'ble Justice Harkoli and Justice Manoj Mishra regarding 72825 posts of Old Advertisement.

And due to this stay happens on new advertisement.

UPTET : टीईटी प्रकरण में अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र की चेतावनी...........



UPTET : टीईटी प्रकरण में अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र की चेतावनी...........
Court gave one month time for implementation of new advertisement along with reply by 24th April 2013 else charges may be framed on concerned authorities.

 इलाहाबाद : बेसिक शिक्षकों की भर्ती के मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि प्रथमदृष्टया इस प्रकरण में आदेशों की अवहेलना प्रतीत होती है। कोर्ट ने सख्त कदम उठाते हुए अधिकारियों को आदेश के अनुपालन के लिए एक माह का समय दिया है। साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि ऐसा न होने पर आरोप पत्र तैयार किया जाएगा। मामले की अगली तिथि 24 अप्रैल निर्धारित की गई है। इस तिथि को अधिकारियों से जवाबी हलफनामा भी मांगा गया है

विश्वनाथ प्रताप सिंह की ओर से दाखिल अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने यह आदेश सुनाया। याचिका में कोर्ट के उस आदेश की अवहेलना किए जाने की बात कही गई थी जिसमें बीए-बीएससी, बीएड अभ्यर्थियों को भी भर्ती में शामिल करने के लिए कहा गया था। मंगलवार को याची का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता आशीष त्रिपाठी ने कोर्ट के संज्ञान में यह तथ्य रखा कि बेसिक शिक्षा विभाग ने अभी तक भूल-सुधार नहीं प्रकाशित किया है और वेबसाइट भी नहीं शुरू की गई है। गौरतलब है कि अदालत भूल-सुधार प्रकाशित करने और वेबसाइट शुरू करने का आदेश पूर्व में ही दे चुकी है

उल्लेखनीय है कि गत 16 जनवरी को अदालत ने बीए, बीएससी के साथ बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों भर्ती में शामिल करने का निर्देश दिया था। इसके लिए 15 दिन की समय सीमा निश्चित की गई थी। आदेश का अनुपालन न होने पर यह अवमानना याचिका दायर की गई है

Monday, 4 March 2013

UPTET NESXT HIRING on 06-03-2013


UPTET : टी0ई0टी0  प्रशिक्षु की सुनवाई 06-03-2013 को

मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद में टी0ई0टी0प्रशिक्षु की सुनवाई की जानी थी, मा0जज श्री हरकौली आज अवकाश पर होने के कारण सुनवाई की कार्यवाही नहीं की जा सकी। जिस कारण उक्त याचिका को अन्यत्र बेन्च में स्थानान्तिरत किया गया था, परन्तु अदालत का समय आज समाप्त हो गया है और सुनवाई नहीं हो पायी। विदित हुआ है कि अगली सुनवाई 6 मार्च को होगी
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 अनुदेशक आवेदन में दिन भर माथापच्ची-
 इलाहाबाद (ब्यूरो)। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से प्रदेश के जूनियर हाईस्कूलों में अंशकालिक अनुदेशकों की भर्ती का ऑनलाइन आवेदन तकनीकी खामियों की भेंट चढ़ रहा है। सर्वर धीमा होने के कारण अभ्यर्थी फीस के लिए पंजीकरण नहीं कर सके। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से अंशकालिक अनुदेशकों के पदों पर भर्ती के लिए 25 फरवरी से आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए आवेदन के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 18 मार्च है। ई-चालान से शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 21 मार्च है। पूरी तरह से भरे आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 23 मार्च है। आवेदन की तिथि नजदीक आने के साथ अभ्यर्थियों का रुझान आवेदन के लिए बढ़ रहा है। आवेदकों की शिकायत है कि बेसिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर दिनभर सर्च करने केबाद आधा फार्म भरने के बाद वेबसाइट हैंग होने की घटना बढ़ गई है।

Sunday, 3 March 2013

Anudeshak Recruitment in uttar pradesh


आज केस की सुनवाई समयाभाव के कारण
नहीँ हो सकी और रिज्वाइन्डर भी नहीँ दाखिल
हुआ। अगली सुनवाई की तिथि-06/03/2013

Anudhsak requirment, uptet latest news, tet groups : This is a blog of uttar pradesh Anudeshak Recruitment in UP : संशोधित --बदली योग्यता से अनुदेशकों भर्ती पर संकट
-वर्ष 2011 के विज्ञापन में अलग योग्यता को बनाया गया था आधार
- अस्थाई नियुक्त अनुदेशक व अन्य हाईकोर्ट की शरण में


इलाहाबाद : प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के बाद अब 41,307 अंशकालिक अनुदेशकों की भर्ती पर भी संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। प्रदेश सरकार ने इस भर्ती के लिए योग्यता के मानकों में परिवर्तन कर दिया है। इसके चलते पूर्व में अस्थाई रूप से नियुक्त अनुदेशक व इस पद के लिए प्रयासरत हजारों अन्य अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं। यह सभी लगातार उच्चाधिकारियों के पास गुहार लगाते रहे पर अब तक इनकी सुनवाई नहीं हुई है। इसके चलते अब यह अभ्यर्थी उच्च न्यायालय की शरण में जा रहे हैं।

प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के लिए सात फरवरी को शुरू हुई काउंसिलिंग उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद पहले ही रोकी जा चुकी है। अब अनुदेशकों का मामला भी अदालत जाने को तैयार हैं। गड़बड़ी की जड़ में अनुदेशक भर्ती के लिए जारी शैक्षिक योग्यता है। इस बार जारी विज्ञापन में प्रदेश के 13769 विद्यालयों में कुल 41307 अंशकालिक अनुदेशकों की भर्ती के लिए 23 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं।

इस भर्ती प्रक्रिया में अनुदेशक के लिए बीएससी कृषि के साथ फल संरक्षण में डिप्लोमा होना अनिवार्य रखा गया है। इससे पूर्व 24 अगस्त 2011 को बीएसए, इलाहाबाद ने अंशकालिक अनुदेशक का जो विज्ञापन जारी किया था उसमें खाद्य एवं फल संरक्षण को एक अलग ट्रेड बनाया था। इसके लिए डिप्लोमा होना अनिवार्य था। बीएससी कृषि की बाध्यता नहीं थी।

अभ्यर्थियों के अनुसार शैक्षिक योग्यता में इस परिवर्तन से फल संरक्षण व अन्य विधाओं में डिप्लोमा करने वाले दूसरे विषयों के स्नातक छात्र वंचित हो जा रहे हैं। साथ ही पिछले वर्ष नियुक्त अंशकालिक अनुदेशकों को भी अब इसमें अवसर नहीं मिलने जा रहा है। फिलहाल, अभ्यर्थियों ने उच्चाधिकारियों द्वारा सुनवाई न होने पर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है। उनके अनुसार सोमवार को इस मामले में अपील फाइल हो जाएगी। इसमें उम्र सीमा भी लोक सेवा आयोग की तर्ज पर बढ़ा कर 40 वर्ष करने की मांग की जा रही है।

18 तक कराएं पंजीकरण

अभ्यर्थी 18 मार्च तक डब्ल्युडब्ल्युडब्ल्यु डॉट यूपीबेसिकइडीयूपरिषद डॉट जीओवी डॉट इन पर पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के बाद दूसरे दिन दो बजे से चालान और उसके दो दिन बाद आवेदन किया जा सकेगा। 21 मार्च तक चालान जमा होंगे और 23 मार्च तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। अभ्यर्थी को अपने ही जिले में आवेदन करने की छूट दी जा रही है।

नहीं लिया सबक


बेसिक शिक्षा परिषद ने प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के दौरान आई समस्या से कोई सबक नहीं लिया है। भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया सहज होने के बजाय मुसीबत का सबब बनती जा रही है। चालान जमा करने के लिए बैंकों में उमड़ने वाली भीड़ से बचने के लिए अभ्यर्थियों की ऑनलाइन भुगतान की मांग पर भी कोई विचार नहीं किया गया। आवेदन के लिए केवल एक वेबलिंक उपलब्ध होने के चलते दिन में कई बार वेबसाइट बंद हो जाने और सर्वर जाम की समस्या आ रही

Friday, 1 March 2013

server made a big problems for anudeshak bharti


CTET 2013
As per some sources next CTET exam will be conducted on July 28, 2013. It it the last Sunday of July in 2013
 jaise hi puri update milegi- www.uptetblogspot.blogspot.in par uplabdh kar diya jayega
वेबसाइट बना आवेदकों के लिए मुसीबत का सबब
सर्वर में अटका अनुदेशक भर्ती फार्म

जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : कटरा के एक साइबर कैफे में आवेदन करने पहुंचे रामकुमार, महेंद्र,आनंद आदि शुक्रवार को दोपहर एक बजे से शाम छह बजे तक अनुदेशक भर्ती के लिए आवेदन करने के लिए जूझते रहे। इन सबने फार्म भरने के बाद फोटो अपलोड की तो पेज ही रिजेक्ट हो गया। साइबर कैफे संचालक से शिकायत की तो उसने सर्वर डाउन होने की समस्या बताकर पल्ला झाड़ लिया। शनिवार को अनुदेशक भर्ती के अभ्यर्थी सर्वर के चलते परेशान हुए।
प्रदेश के 13769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 41307 अंशकालिक अनुदेशकों की भर्ती के लिए 23 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन के लिए एनआइसी की ओर से डब्ल्युडब्ल्युड ­ ­ब्ल्यु डॉट यूपीबेसिकइडीयू परिषद डॉट जीओवी डॉट इन वेबसाइट तैयार की है। इस वेबसाइट पर फार्म भरनेके लिए एक ही लिंक दिया गया है। इसी पर पूरे प्रदेश भर के लाखों अभ्यर्थी अपना आवेदन कर रहेहैं। 18 मार्च तक पंजीकरण कराया जा सकता है। इसके बाद दूसरे दिन दो बजे से चालान और उसके दो दिन बाद आवेदन किया जा सकता है। 21 तक चालान जमा होंगे और 23 मार्च तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। अभ्यर्थी को अपने ही जिले में आवेदन कीछूट दी जा रही है।
दो बजे के बाद जमा करें चालान
अभ्यर्थियों के लिए वेबसाइट पर जारी निर्देशों के तहत आवेदन के लिए पंजीकरण के अगलेबैंक कार्य दिवस में दोपहर दो बजे के बाद चालान जमा किए जाने की व्यवस्था की गई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से 9695775169, 9919472775, 9935168881,0522 ­-4132703, 4132707 और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से 0522-2782853 आदि हेल्पलाइन जारी की गई है।
पात्रता की पूछताछ सबसे ज्यादा
सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय में जिले के लिए बनाए गए हेल्पलाइन नंबर पर प्रतिदिन पांच सौ सेज्यादा फोन कॉल आ रहे हैं। हेल्पलाइन के संचालनके लिए तैनात अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर फोनपात्रता के नियम के बारे में पूछने को आ रहे हैं।
बेसिक शिक्षा सचिव को ज्ञापन
अनुदेशक भर्ती में बीए के अतिरिक्त बीएससी और बीकॉम के अभ्यर्थियों को शामिल किए जाने की मांग को लेकर बेसिक शिक्षा सचिव को एक ज्ञापन भेजा गया है। वहीं उम्र सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर भी एक मांग पत्र बेसिक शिक्षा निदेशक और सचिव को भेजा गया है। इसमें अनुदेशक भर्ती की आयु सीमा 35 से बढ़ाकर 40 वर्ष किए जाने की मांग की गई है।
अनुदेशकों की नियुक्ति में जिले की पाबंदी अनुचित’
Kasganj | Last updated on: March 2, 2013 5:30 AM IST
कासगंज। बीपीएड बेरोजगार संघ की बैठक जिला उपाध्यक्ष के आवास पर हुई। बैठक में अनुदेशकों की भर्ती के लिए आवेदन पत्र भरने को जिले की पाबंदी पर रोष जताया गया। बेरोजगारों ने सभी जनपदों में फार्म भरने की व्यवस्था लागू करने की मांग की।
जिला महामंत्री ग्रीश चन्द्र ने कहा कि अनुदेशकों के आवेदन फार्म भरने के लिए जिले की जो पाबंदी लागू की गई है, वह अनुचित है। विशिष्ट बीटीसी एवं कस्तूरबा शिक्षकों को सभी जिलों में आवेदन के लिए छूट दी जाती है। ऐसी ही व्यवस्था अनुदेशकों की भर्ती में लागू की जाए। इस दौरान राजीव माथुर, विजय प्रताप, संजय कुमार, सुनीत कुमार, संगीता देवी, हाकिम सिंह, रजनीश कुमार, प्रबंध कुमार, प्रदीप कुमार, धर्मेन्द्रसिंह, महिमा वर्मा, पंकज वर्मा, उदयवीर, मनमोहनपाठक, श्याम सुंदर, इरफान, मुकेश माथुर, मुकेश चंडोक, संकल्प पचौरी, अजय पाल, कपिल देव, सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।
 -टीजीटी व पीजीटी की लंबित परीक्षाओं के आयोजन पर फैसला नही
UP TGT / PGT RECRUITMENT : -टीजीटी व पीजीटी की लंबित परीक्षाओं के आयोजन पर फैसला नही-इलाहाबाद :

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड बोर्ड आने वाले दिनों में पूरी तरह से कंप्यूट्रीकृत हो जाएगा। बोर्ड के ढांचे में बदलाव होगा। बुधवार को चयन बोर्ड की बोर्ड बैठक में इस पर सहमति बनी। बैठक में लंबित परीक्षाओं के आयोजन को लेकर कोई बड़ा फैसला तो नहीं किया गया पर इसे लेकर नए सिरे से कवायद शुरू करने पर जोर दिया गया।
बैठक के आरंभ में बोर्ड अध्यक्ष प्रो.देवकीनंदन शर्मा ने कहा कि बोर्ड की छवि सुधारने को लेकर सरकार चिंतित है लिहाजा इस दिशा में बहुत काम किए जाने की जरुरत है। तय किया गया कि आने वाले दिनों में बोर्ड को पूरी तरह से कंप्यूट्रीकृत कर दिया जाए इससे काम में तेजी के साथ पारदर्शिता आएगी। अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। बैठक में बोर्ड के वर्तमान ढांचे की समीक्षा की गई। संबंधित अधिकारियों से बातचीत के बाद ढांचे को मानक के अनुरूप किए जाने पर सहमति बनी। बैठक में प्रशिक्षित स्नातक व प्रवक्ता (पीजीटी) की लंबित परीक्षाओं के आयोजन के संबंध में विचार विमर्श किया गया लेकिन कोई बड़ा निर्णय नहीं किया जा सका। अध्यक्ष ने कहा कि ढांचा दुरुस्त किए जाने के बाद इस पर कोई भी निर्णय लिया जाना उचित होगा। लेकिन इसके लिए विभागीय कवायद जारी रहनी चाहिए। अध्यक्ष ने पिछली बोर्ड बैठक में किए गए निर्णयों की समीक्षा भी की
टीईटी धांधली के आरोपी देशराज की बेल नामंजूर
इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने टीईटी में धांधली करने के आरोप में पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक संजय मोहन के सहयोगी देशराज की जमानत नामंजूर कर दी है। इस मामले में हाईकोर्टसंजय मोहन की जमानत पहले ही खारिज कर चुका है। देशराज के जमानत प्रार्थनापत्र पर न्यायमूर्ति एपी साही ने सुनवाई की। आरोपी का कहना था कि उसकी इस मामले में कोई संलिप्तता नहीं है। वह मात्र उस गाड़ी में बैठा था, जिससे दस्तावेज बरामद किए गए। न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया अपराध में संलिप्तता प्रतीत होती है। जमानत का पर्याप्त आधार नहीं है।