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Monday, 18 March 2013

V BTC tell for naukari


विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षितों ने मांगी नौकरी
जागरण संवाददाता, लखनऊ : सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति की मांग को लेकर विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त बेरोजगारों ने सोमवार को विधान भवन के सामने धरना दिया। विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन के आान पर जुटे प्रशिक्षितों ने सरकार से खाली पदों के सापेक्ष उनकी भर्ती करने की मांग की। देर शाम प्रशिक्षितों ने विधानभवन के सामने से हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा तक कैंडल मार्च भी निकाला।
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संयोजक राजनारायण ने कहा कि हम लोगों के साथ वर्ष 2007-08 में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रशिक्षणार्थियों की नियुक्ति कर दी गई, लेकिन उस समय करीब पांच फीसद लोगों की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। छह महीने बाद डायट में विशेष प्रशिक्षण पूरा होने के बावजूद उनकी नियुक्ति नहीं की जा रही है। प्रशिक्षितों ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में प्राथमिक विद्यालयों में रिक्त सहायक अध्यापकों के पद पर नियुक्ति की मांग की।

माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्तिसे रोक हटी Updated on: Mon, 18 Mar 2013 07:28 PM (IST
विधि संवाददाता, पटना : पटना हाईकोर्ट ने सहरसा में माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों केशिक्षकों की नियुक्ति के लिए हुई पात्रता परीक्षा को रद करते हुए शेष जिलों में नियुक्ति पर लगी रोक हटा ली है। पात्रता परीक्षा पिछले साल 17 फरवरी को हुई थी। अब यहां नए सिरे से परीक्षा होगी। अदालत ने प्रदेश के अन्य जिलों में प्रश्नपत्र लीक होने के बाद की गई कार्रवाई के बारे में राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी।
न्यायाधीश मिहिर कुमार झा की पीठ ने सोमवार को विल्सन की याचिका पर सुनवाई करते हुए पात्रता परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर उच्चस्तरीय कमेटी भी गठित करने का निर्देश दिया। इसके लिए शिक्षा विभाग को 30 मार्च तकस्थिति स्पष्ट करनी होगी कि शिकायतें मिलनेके बाद क्या कार्रवाई की गई थी? अगली तिथि को यह भी बताना होगा कि उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की गई अथवा नहीं?
याचिकाकर्ता के वकील अमृत अभिजात एवं मनोज कुमार गुप्ता ने सम्मिलित रूप से कहा कि सहरसा में परीक्षा होने के पहले ही प्रश्न पत्र बाजार में बिक रहे थे। इसकी पुष्टि सहरसा के डीएम ने भी की थी। परन्तु शिकायतोंकी परवाह नहीं कर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने 16 जून को रिजल्ट भी प्रकाशित कर दिया गया। अधिवक्ता द्वय का कहना था कि परीक्षा में गड़बड़ियों की शिकायत अन्य जिलोंसे भी आई लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। अदालत का मानना था कि जब बड़े पैमाने धांधली की शिकायत मिली थी तो संबंधित पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए थी। ऐसे मामले में सरकार को स्वयं हस्तक्षेप करना चाहिए था, ताकि 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो सके। याद रहे कि कोर्ट ने 26 फरवरी को शिक्षकों को नियुक्ति पर रोक लगाई थी।