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Sunday, 20 January 2013

शिक्षकों की भर्ती ने भरी सरकार की तिजोरीएलएन त्रिपाठी

शिक्षकों की भर्ती ने भरी सरकार की तिजोरीएलएन त्रिपाठी
, इलाहाबाद आम तौर पर कर्मचारियों की नियुक्ति सरकार के लिए आर्थिक रूप से बोझ का सबब बनती है। शिक्षकों की भर्ती का मामला इससे एकदम अलग है। जनगणना से लेकर आर्थिक सर्वेक्षण तक हर काम में इस्तेमाल होने वाले बहुउद्देश्यीय प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती सरकार के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी साबित हो रही है। वर्तमान में चल रही भर्ती प्रक्रिया में अब तक करीब 345 करोड़ की भारी भरकम धनराशि प्रदेश सरकार के तिजोरी में पहुंच चुकी है। यह पैसा बेरोजगारी के भारी बोझ से दबे प्रदेश के उसी युवा और उनके अभिभावकों ने दिया है, प्रदेश सरकार जिनके हितैषी होने का लगातार दम भरती है। माना यह जा रहा है कि उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने जा रहे बेरोजगार बीएड कुछ ही दिनों में इस खजाने को दोगुना कर देंगे। प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया पिछले पांच वर्षो से अटकी पड़ी है। बसपा सरकार ने वर्ष 2011 में इस भर्ती को व्यापक पैमाने पर कराने की कोशिश की। इसमें हर जिले के लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से 500-500 रुपये शुल्क मांगा गया था। बाद में उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया तो सरकार ने एक ही चालान के आधार पर पांच जिलों में आवेदन की छूट दे दी थी। यह भर्ती बाद में कानूनी समस्याओं में फंस गई और अंतत: निरस्त हो गई। इस दौरान अभ्यर्थियों द्वारा जमा पैसे करीब साल भर बाद अब वापस होने जा रहे हैं। 72825 पदों के लिए वर्तमान प्रदेश सरकार ने एक बार फिर विज्ञापन निकाला। इसबार अभ्यर्थियों की संख्या में कई गुना का इजाफा हो गया। प्रदेश सरकार ने इस भर्ती के आर्थिक फायदों का और बेहतर तरीके से दोहन करने के लिए जोरदार व्यवस्था की। इस बार सारे जिलों के लिए आनलाइन आवेदन मांगे गए। इसमें हर जिले के लिए अलग चालान संख्या दर्ज करनी थी। इसके चलते भारी संख्या में चालान बनवाए गए। एसबीआई के अधिकारियों की माने तो सात जनवरी को आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त होने तक करीब 69 लाख चालान जमा हो चुके हैं। इन चालान के माध्यम से 345 करोड़ रुपये राज्य सरकार के खाते में आ चुके थे। इस बीच 16 जनवरी को उच्च न्यायालय ने इस चयन प्रक्रिया में बीएड धारकों को टीईटी उत्तीर्ण किए बिना ही चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दे दी। इसके बाद अंदाज यह लगाया जा रहा है कि सरकार की तिजोरी में पहुंचने वाली रकम में खासा इजाफा हो जाएगा। फिलहाल, अब सरकार के नए विज्ञापन का इंतजार है। बेरोजगार अभ्यर्थी सरकार सेलेकर उच्च न्यायालय तक से परीक्षा शुल्क कम करने की मांग कर चुकेहैं पर अभी तक उनके हाथ असफलता ही लगी है।