You could put your verification ID in a comment Or, in its own meta tag

Tuesday, 9 April 2013

uptet news of 10 april 2013



 शिक्षकों की भर्ती हल अप्रैलके अंत तक-
जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती मामले में अब सबकी निगाहें 16 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिक गई हैं। बता दें कि 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया काउंसिलिंग शुरूहोने के पहले दिन ही रोक दी गई थी। प्रशिक्षु शिक्षक के लिए 67लाख आवेदन किए गए हैं। भर्ती की प्रक्रिया में खामी का आरोप लगाते हुएसौ से ज्यादा अभ्यर्थियों ने अदालत में याचिका दायर की है। सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई हो रही है। बेसिक शिक्षा सचिव संजय सिन्हा का कहना है
uptet
कि अभ्यर्थियों की मुश्किल को लेकर विभाग संजीदा है। उन्होंने माना कि भर्ती में देरी से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बताया कि इस मामले में विभाग ने अदालत में अपना पक्ष रख दिया है। अगली सुनवाई तक कुछ ठोस निर्णय सुनने को मिल सकता है।
टीईटी मामले के पटाक्षेप का इंतजार टीईटी की वैधता का मामला प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती की राह  का सबसे बड़ा रोड़ा है। टीईटी में धांधली का मामला उजागर होने के बाद से पारदर्शिता को लेकर लगातार सवालउठाए जा रहे हैं। इस मुद्दे को अदालत तक ले जाने वाले कुछ याची नए सिरे से परीक्षा कराए जाने की मांग कर रहे हैं। कुछ याचिकाकर्ताओं ने केवल टीईटी के विवादित
परीक्षार्थियों के मामलोंको छोड़ कर बाकी परीक्षा परिणाम को मान्यता देने कीमांग की है। प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में टीईटी को केवल पात्रता परीक्षा माना गया है। इसमसले पर भीअदालत में मामला विचाराधीन हैं। तमाम अभ्यर्थी टीईटी मेरिट के आधार पर ही भर्ती के पक्षधर है।
शिक्षकों की मांगों को लेकर माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री से  ग्यारह सूत्री मांग पत्र पर र्चचा की।
लखनऊ (एसएनबी)। शिक्षकों की मांगों को लेकर मंगलवार को राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष पारस नाथ पाण्डेय माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री विजय बहादुर पाल से मिले तथा ग्यारह सूत्री मांग पत्र पर र्चचा की। राज्य मंत्री से र्चचा करते हुए श्री पाण्डेय ने कहा कि वर्ष 2000 से प्रमोशन नहीं हुए हैं, जिससे 90 फीसद राजकीय इण्टर कालेजों में प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक नहीं है। प्रदेश में 70 फीसद शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इससे राजकीय विद्यालयों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि वार्ता के दौरान राज्य मंत्री ने कहा है कि जब राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक राज्य कर्मचारी हैं तथाराज्य कर्मचारियों को 2010 से वेतनमान (एसीपी) का लाभ दिया जा चुका है। साथ ही माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने भी राजकीय शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति एसीबी का लाभ प्रदान करने का प्रस्ताव भेजा है तो निश्चित रूप से लाभ मिलना ही चाहिए। उन्होंने बताया कि इस दौरान बोर्ड परीक्षा पारिश्रमिक बढ़ाने, बोर्ड परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं के बन्डल वाहक का कार्य शिक्षकों से न कराए जाने, खण्ड शिक्षाधिकारी के बराबर राजपत्रित पद, प्रवक्ता, प्रधानाध्यापक व प्रधानाचार्य के पदों पर प्रोन्नित की डीसीपी शीघ्र कराने, प्रथम नियुक्ति को मौलिक नियुक्ति तिथि मानकरवरिष्ठता प्रदान करने, प्रौढ़ शिक्षा के समायोजित शिक्षकों की पूर्व सेवाओं को जोड़नेपर पुर्नविचार आदि मांगों पर विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर संघ के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

मोअल्लिम वालों को शिक्षक पद पर जून तक पूरी कर ली जाएगी चयन प्रक्रिया..जुलाई में तैनाती परन्तु अलग से टीईटी पर फंससकता है विवाद...
लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का मामला साफ होने के बाद अब मोअल्लिम वालों को शिक्षक बनाने की कवायद शुरू हो गई है। राज्य सरकार मोअल्लिम और डिप्लोमा इन टीचिंगकरने वालों की चयन प्रक्रिया जून तक पूरी कर लेगी और जुलाई में इन्हें उर्दू भाषा शिक्षक के रूप में तैनाती दे देगी। बेसिक शिक्षा निदेशालय सेइसके लिए जिलेवार रिक्तियों का ब्यौरा मांगा गया है। इसके आधार पर जून में टीईटी के साथ या अलग से परीक्षा कराते हुए चयन प्रक्रिया पूरीकी जाएगी।
uptet
उत्तर प्रदेश में मोअल्लिम-ए-उर्द ­ू और अलीगढ़ विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन टीचिंगकरने वालों को वर्ष 1997 से पूर्व तक उर्दू भाषा शिक्षक के रूप में रखा जाताथा, लेकिन 11 अगस्त 1997 को इस उपाधि को भाषा शिक्षक के लिए अपात्र मान लिया गया। मोअल्लिम वालों को हाईकोर्ट से राहत मिली तो राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका दाखिल कर दी। बसपा सरकार ने वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट से विशेष अनुज्ञा याचिका वापस लेकर इन्हें उर्दू भाषा शिक्षक के रूप में रखने का निर्णय किया था, लेकिन विधानसभा चुनाव आनेकी वजह से इनकी भर्ती नहीं हो सकी।
प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद मोअल्लिम वालों ने अखिलेश सरकार पर बिना टीईटी भर्ती के लिए दबाव बनाना शुरू किया और यह कामकर गया। राज्य सरकार ने अब टीईटी की तर्ज पर अलग से परीक्षा कराने का निर्णय करते हुए जिलों से उर्दू शिक्षकों के रिक्त पदों का ब्यौरा मांगा है। इसके पहले जून के आखिरी सप्ताह में टीईटी के साथ या फिर अलग से परीक्षा कराकर चयन प्रक्रिया पूरीकर ली जाएगी। इसके बाद जुलाई में स्कूल खुलते ही इन्हें तैनाती दे दी जाएगी।uptet