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Tuesday, 23 April 2013

uptet news of 24 april 2013


प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने बताया कि 1.70 लाख शिक्षा मित्रों को दो वर्षीय ट्रेनिंग देकर
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सहायक अध्यापक बनाया जाएगा-
प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने बताया कि 1.70 लाख शिक्षा मित्रों को दो वर्षीय ट्रेनिंग देकर सहायक अध्यापक बनाया जाएगा। इस वर्ष 60 हजार, अगले वर्ष 64 हजार और शेष 46 हजार को जून 2015 तक सहायक अध्यापक बना दिया जाएगा। 72,825 टीईटी पास बीएड वालों को तथा 10,800 विशिष्ट बीटीसी को विधिक अड़चन दूर होने के बाद शिक्षक बनाया जाएगा। डायट में प्रवक्ता के खाली पदों पर भी शीघ्र भर्ती की जाएगी। सभी स्कूलों में पेयजल व शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। बच्चों को प्रवेश देने के लिए स्कूल चलो अभियान चल रहा है। लड़कियों के लिए 746 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय चल रहे हैं। आशीर्वाद योजना के तहत स्कूली बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। मानक के अनुसार स्कूल खोले जा रहे हैं। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कन्या विद्या धन योजना शुरू की गई है। नवीन सूचना और संचार तकनीकी से परिचित कराने के लिए 50 लाख छात्र-छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप व टैबलेट दिए जाएंगे। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री योगेश प्रताप सिंह, कैलाश चौरसिया, वसीम अहमद, माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल ने भी विचार रखे।
उत्तर प्रदेश राज्य प्रवेश परीक्षा (यूपीएसईई)
जागरण संवाददाता, लखनऊ : उत्तर प्रदेश राज्य प्रवेश परीक्षा (यूपीएसईई) के जरिए प्रदेश के नामचीन सरकारी कॉलेजों की सीट सात से दस लाख रुपये में बिकती है। मुन्ना भाई और सर्किट के पांच साल से सक्रिय गिरोह ने यह कीमत तय की है। ग्राहक की तलाश से लेकर प्रवेश कराने तक की एक लंबी चेन है। सभी में काम के आधार पर यह राशि बांटी जाती है। पैसे का हिसाब परीक्षा परिणाम और प्रवेश होने के बाद किया जाता है। यह गिरोह कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सक्रिय है और इसके तार यूपी के अलावा मध्य प्रदेश और बिहार से भी जुड़े हैं।
यूपीएसईई में तेजपाल गंगवार के स्थान पर फिरोजाबाद निवासी प्रकाश पांवरिया को परीक्षा देते पकड़ा गया था। प्रकाश ने क्राइम ब्रांच को बताया है कि इस परीक्षा के एवज में उसे 75,000 रुपये देने का वादा किया गया था। प्रकाश ने इस कड़ी को तोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण जानकारियां क्राइम ब्रांच को दी हैं। ग्राहक की तलाश में एक टीम सक्रिय रहती है। दूसरी टीम आइईटी के छात्रों को पैसा का लालच या जान से मारने की धमकी देकर दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने के लिए तैयार करते हैं। एक टीम इन छात्रों को परीक्षा केंद्र तक ले जाने का कार्य करती है। फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए जिम्मेदारी अलग लोगों को दी जाती है। इन सब कार्यो में सहयोग करने और मास्टर दिमाग देते हैं आइईटी के कुछ शिक्षक। इन रुपयों को इन सभी में काम के हिसाब से बांटा जाता है। ग्राहक की तलाश करने वाले को एक-एक लाख रुपये, परीक्षा के दो दिन पहले से तैयारी करने और परीक्षा के दिन छात्र को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने पर 50-50 हजार रुपये दिए जाते हैं। परीक्षा के लिए आइईटी के छात्र को तैयार करने वाला दो लाख रुपये रखता है। परीक्षा देने वाले फर्जी अभ्यर्थी 70 हजार से डेढ़ लाख रुपये दिए जाते हैं। इन सब में सहयोग और छात्रों को संरक्षण देने के लिए एक बड़ा हिस्सा शिक्षकों तक पहुंचाया जाता है। कुछ वर्ष पहले तक यह राशि तीन से चार लाख रुपये थी लेकिन बढ़ती महंगाई ने इसकी कीमत भी बढ़ा दी है।
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अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं भी निशाने पर
यूपीएसईई ही नहीं प्रदेश में विवादों में रही अध्यापक पात्रता परीक्षा, पुलिस और बैंक की विभिन्न परीक्षाएं और एसएससी की ओर से आयोजित कई परीक्षाओं में भी ये छात्र शामिल हो चुके हैं। खुशाल बाबू के कमरे से जीबीटीयू अधिकारियों को बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें मिली थीं। प्रकाश पांवरिया भी बिहार में वन रक्षक और मध्य प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल की प्रवेश परीक्षा देने गया था। इसके लिए प्रकाश को 50-50 हजार रुपये देने का वादा किया गया था। दूसरे प्रदेशों के अलावा प्रदेश के अन्य इलाकों से भी इस गिरोह के तार मिलने के सुबूत मिले हैं। बरेली, कानपुर और सीतापुर में पकड़े गए युवकों का चिट्ठा भी क्राइम ब्रांच खंगाल रही है। इनके तार भी इस गिरोह के साथ जोड़कर देखे जा रहे हैं।
कमाई से पनपे कई गिरोह
बीते चार सालों से लगातार यह धंधा चल रहा है। अच्छी कमाई और पकड़े जाने का डर न होने से एक-एक कर कई गुट पनप गए हैं। वर्तमान समय में आइईटी में चार गुट काम कर रहे हैं। इसमें से एक गुट फिरोज बेग का है। इसी में सचिन श्रोतिया और सईद खान है। रविवार को पकड़ा गया खुशाल बाबू लगातार इन छात्रों का नाम ले रहा है। इनके अतिरिक्त एक गुट अभिषेक यादव चला रहा है यह पिछले कुछ सालों तक ज्यादा सक्रिय था। अमित और अनुज रावत का नाम भी अन्य गुटों में से सामने आया है।
टॉपर्स को आते थे फोन
ये गुट लगातार ऐसे छात्रों को निशाने पर लेते थे जो पढ़ने में तेज होते हैं। उनके साथ दोस्ती, पैसे की लत डलवाना और फिर धीरे-धीरे परीक्षा के लिए तैयार करना इन गुटों का प्रमुख कार्य रहता है। आइईटी के कुछ छात्रों ने बताया कि ये गुट लगातार फोन कर उन्हें भी परीक्षा देने के लिए दबाव डालते थे। पचास हजार रुपये का लालच भी दिया जाता था। मना करने पर जान से मारने की धमकी दी जाती है। आइईटी के शिक्षकों की शहर मिली होने के कारण छात्रों की शिकायत पर कोई कार्रवाई होने की बजाय उल्टा धमकी मिलना शुरू हो जाती थीं। इसी का नतीजा है गिरोह दिन पर दिन बढ़ता चला गया।
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सरकारी स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को बदनाम करने की साजिश
लखनऊ : बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने मंगलवार को यहां शिक्षा अधिकारियों की राज्य स्तरीय संगोष्ठी में यह कहकर चौंका दिया कि सुनियोजित षडयंत्र के तहत सरकारी स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को बदनाम करने की साजिश हो रही है। उन्होंने कहा कि यूपी बोर्ड परीक्षाओं में नकल का हल्ला हर साल होता है लेकिन कोई यह नहीं जानता कि कब सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाएं हो जाती हैं और कौन उनकी कॉपियां जांचता है। सरकारी स्कूलोंकी दुर्दशा पर उन्होंने केंद्र सरकार को पर्याप्त संसाधन मुहैया न कराने के लिए भी कठघरे में खड़ा किया। यह कहते हुए कि सिर्फ सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए योजनाओं को लागू कर देने भर से शिक्षा का भला नहीं होगा ।
बेसिक शिक्षा मंत्री नई दिल्ली के राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन विश्वविद्यालय (न्यूपा) और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से मंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चों की तो यूनिफॉर्म भी गरीब होती है। केंद्र सरकार एक सेट यूनिफॉर्म के लिए मात्र 200 रुपये स्वीकृत करती है जो नाकाफी है। केंद्रीय शिक्षा सलाहकार परिषद (कैब) की बैठक में यूनिफॉर्म की धनराशि बढ़ाने तथा बच्चों को टाई व जूता-मोजा उपलब्ध कराने की उनकी मांग को केंद्र ने अनसुना कर दिया। यदि केंद्र सरकार सिर्फ शत प्रतिशत सरकारी स्कूलों में विद्युतीकरण कार्य कराने के साथ शौचालय व पेयजल का प्रबंध करा देतो हम पब्लिक स्कूलों को यह साबित कर देंगे कि प्रतिद्वंद्विता क्या होती है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि महकमे के अधिकारी यदि अपनी सोच बदलकर मनोयोग से जुट जाएं तो शिक्षा का बिगड़ा काम सुधारा जा सकता है।
माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री विजय बहादुर पाल ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चाहते हैं कि बच्चे 'क' से कबूतर की बजाय 'क' से कंप्यूटर पढ़ें। वहीं बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने शिक्षा में गुणवत्ता के साथ नैतिकता पर भी जोर दिया। इससे पहले न्यूपा की प्रो.नजमा अख्तर ने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य शिक्षा अधिकारियों में ऐसा प्रबंध और प्रशासकीय कौशल विकसित करना है जिससे कि वे
। ----- इनसेट ----- सिस्टम को दोष देने से नहीं होगा सुधार : गोविंदा न्यूपा के कुलपति प्रो.आर गोविंदा ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि स्कूलों में बच्चों के नामांकन पर जोर है लेकिन उपस्थिति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उप्र बेसिक एजुकेशन प्रोग्राम के लागू होने के 20 साल बाद भी आज 42 फीसद बच्चे ड्रॉप आउट होते हैं। यहजानने की कोशिश नहीं होती कि क्या आज शिक्षकबेहतर पढ़ा रहे हैं, क्या बच्चो के सीखने-समझने का स्तर बढ़ा है।शिक्षा में सुधार न आनेके लिए सिस्टम पर दोष मढ़ने से काम नहीं चलेगा। निचले स्तर के अधिकारी भी इतने असहाय नहीं कि वे कुछ नहीं कर सकते। देश में 50 फीसद बच्चे आठवीं की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते। बच्चे आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन 19वीं-20वीं सदी की हमारी शिक्षा प्रणाली उन्हें पीछे धकेल रही है। शिक्षा केलिए बनायी गई नीतियों से लोग भले संतुष्ट होंलेकिन वे सुधार की रफ्तार से संतुष्ट नहीं हैं। वे योजनाओं के परिणाम जानना चाहते हैं। ब्रिटिशकाल से विरासत में मिली शैक्षिक प्रबंधन व्यवस्था में भी वे बदलाव चाहते हैं।

बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के प्रमोशन को बेसिक शिक्षा निदेशक ने सहमति दे दी
बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के प्रमोशन को बेसिक शिक्षा निदेशक ने सहमति दे दी है। इसके अलावा शिक्षकों के अंतर जनपदीय तबादले का भी रास्ता साफ हो गया है। यह जानकारी प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष व जिलाध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा ने दी।
प्रांतीय उपाध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि सोमवार को लखनऊ में बेसिक शिक्षा निदेशक और संघ के प्रांतीय अध्यक्ष लल्लन मिश्रा की बैठक में शिक्षकों के हित में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में निर्णय लिया गया कि बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया को इसी सत्र में पूरा कर लिया जाएगा। महिला-पुरुष शिक्षकों के अंतर जनपदीय तबादलों के लिए भी जल्द ही ऑन लाइन आवेदन लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश के नव सृजित जिलों के शिक्षको से मनचाहे जनपदों में तैनाती के लिए भी विकल्प भरवाए जाएंगे। शिक्षकों की प्रमोशन प्रक्रिया के लिए सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। श्री मिश्रा ने बताया कि बैठक में शिक्षकों की कई और मांगों पर भी सहमति बनी। इसके अलावा मृतक आश्रित शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा से मुक्त कराने के लिए केंद्र सरकार से मांग की गई है। इसके अलावा बैठक में प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक को 17140 व उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को न्यूनतम वेतनमान 18150 दिए जाने पर भी चर्चा हुई। प्रांतीय उपाध्यक्ष ने कहा कि शिक्षकों की सभी मांगों को पूरा कराने के लिए संगठन जुटा हुआ है।